Monday, January 30, 2012

कटु सच नारी जीवन by



हंसी आती है फेसबुक/और ब्लॉग   कविताओ को पढ़ कर 

क्योकि  इनमे  पीड़ा और पतिरोध तो होता है पर पुरुष के पति प्रेम ही छाप भी होती है

 सच तो यह  है 
खुद की तलाश करते करते
 तुम थकती क्यों नहीं 
 क्यों नहीं खड़ी होती नारी इंसाफ के लिया
बस कविताए लिखती रहती  हो बेचारी बन कर
हमें भी बाचारी बताती होशयद हमेशा लिखती रहोगी नारी का उपहास के लिया
उफ़
 उफ़
बस करो अब थक गई हूँ
इन रोनी  कविताओ को पड़कर

लिखना है तो किसी नई झासी की रानी की  कविता लिखो
लिखना है तो आसमान को छुते हुआ हाथ की उचाई पर लिखो

लिखा नही तो नारी सम्मान पर लिखो
बस माँ, बेटी, बीवी , और रखेल की कविता ही लिखती हो क्यों

क्यों
क्यों
क्यों
?
अरे नारी का कोई सम्मान भी है
बस बेचारी बनती रहती हो
लगता है तुम्हारी यह कविताये
हमें बस रुलाती ही रहेगी
तुम कहती  हो 
यही है नारी जीवन  का इतिहास  
तो tod do  अपना कलम 

क्योकि 
इतिहास और कविता कहानिया यदि रुलाती है तो 

उन्हें पड़ना लिखना बंद करदेना चाहिए 

 ऐसा इतिहास नए जीवन का सर्जन नहीं कर सकता 

इतिहास  से सिख लेकर ही वर्तमान का सर्जन होता है

 यदि  इतिहास  रुलाता है 

तो वर्तमान भी  रोता है

 और यदि वर्तमान रोता है 

तो भविष्य अन्धिकार  मै ही होगा 

तुम कहती हो 

अम्मा  ने हमें  तो  यह सिखया था 

अरे 

अम्मा की उगली पकड़ कर ही बेटिया  चलती है 

अम्मा के  जीवन की किताब जैसी  ही बेटी  बनती है 

अम्मा यदि प्रतिरोध  करती

तो आज उनकी बेटी सारे आम निसहाये  ना होती 

अम्मा के कलम से रचि  किताब जब बेटी  पढती है तभी  तो 

समाज में आशु बहा जीवन भर अपनी बेचारगी  के लाश को वो ढोती है 

हँ यह भी  सच ही है 




यदि इतिहास के दर्द  से प्रतिरोध  जागता 

तो  वो  इतिहास के लेखो से  क्रांति भी अशक्ति थी  

यदि पहली महिला सती होने से खुद को मन करती

तो अनगिनत महिलाए सती ना होती 

यदि पडली महिला बिकने की बजाये मरना पसंद करती

 तो आज कोई महिला सरे आम ना बिकती 

यदि पहली  महिला अपने    गर्भ  में अजन्मा   बच्ची   को गर्भ  में मारने से inkar      kardeti       तो 

 गर्भी में   कोई मासूम      ना मरती  



2 comments:

anju(anu) choudhary said...

वाह बहुत बढिया ...सत्य के साथ सार्थक रचना
जिसको पढ़ने और बात की गंभीरता को समझने वाले कम मिलेंगे ...

inqlaab.com said...

sukriya anju ji